दलित भाईयों के अलावा चर्च के फादर, मंदिर के पंडित और बुद्ध विहार के भी धार्मिक गुरूओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर संविधान समान समिति के अध्यक्ष दत्तू गायसागर ने कहा कि सीएए, आरएनसी और एनआरपी एक ही हैं और यह सभी कानून दरअसल बाबासाहेब अंबेडकर के कानून को तोड़नेवाले कानून हैं। जबकि इस देश में बाबासाहेब के कानून के अनुसार कोई भेदभाव नहीं है, वहीं वर्तमान सरकार के लाए कानून से साफ सांप्रदायिकता की बदबू आती है। देश में यह भेदभाव का सिलसिला विरोधप्रदर्शन करने से नहीं बल्कि केंद्र में बैठी भाजपा को हटाने के बाद ही खत्म होगा। जबतक आरएसएस की टीम सत्ता में बनी रहेगी संविधान को, अल्पसंख्यकों, दलितों को और अन्य समाज पर खतरा बना रहेगा। रैली के एक अन्य संयोजक और उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष अब्दुल करीम खान ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अब तक सीएए के खिलाफ निकाली रैलियों में किसी भी रैली ने शिलफाटा से लेकर पुलिस स्टेशन तक जितना लंबा रास्ता नहीं तय कियाइसलिए इसे अब तक की सबसे बड़ी रैली कहा जा सकता हैइस रैली की खास बात यह रही कि इसमें कई धार्मिक गुरू एक साथ शामिल हुए हैं, जिसमें दलित भाईयों एवं महिलाओं की बड़ी संख्या नजर आई। इस रैली के दौरान शिलडायघर पुलिस स्टेशन और मुंब्रा पुलिस स्टेशन के सभी अधिकारी काफी चाको चौबंद नजर आए। यातायात विभाग के उच्च अधिकारी भी यहां आ पहुंचे। सड़क के दोनों छोर पर पुलिस के कड़े बंदोबस्त रहा और इसी के साए में मैक कंपनी पहुंचकर इस रैली सफलतापूर्वक समापन हुआ।
NRC-CAA-NPR के विरोध में उत्तरभारतीय महासंघ...